Saturday, September 11, 2010

बाजार और धर्म

 बाजार में सब बिक रहा है धर्म इससे अछूता नहीं है . आज गणेश चतुर्थी का दिन और बाजार   में भगवान् गणेश की मूर्तियाँ बड़े पैमाने पर बिक रही हैं . श्रधा का दोहन बाजार कैसे करता यह विचारणीय है . गणेश को बुध्धि  का देवता मना गया है . पूर्वजों ने गणेश का जो स्वरूप गढ़ा है वह अद्भुत है . सभी देवताओं  के अपने -अपने वाहन हैं . गणेश का वाहन चूहा बताया गया है . सभी देवताओं में गणेश का बजन ही सबसे अधिक होना चाहिए फिर उनका वाहन इतना कमजोर  क्यों ? असल में ज्ञान का कोई बजन नहीं होता और ज्ञान तब तक बेकार है जब तक वह तर्क पर आरूड न हो . वह ज्ञान किस काम का जो समय के अनकूल तर्क पैदा न कर सके . हामारे पुरखों नें यही सन्देश भगवान गणेश के माध्यम से देने की सोची होगी . आज इस कम्प्यूटर के युग में भी देखें कि बिना माउस के कम्प्यूटर  किसी काम का नहीं  होता यानी कि ज्ञान को तर्क चाहिए ही .चूहा ही एक ऐसा प्राणी है जो रात और दिन काट पीट करता रहता है . कहते हैं कि एक बार एक शेर  जाल में फंस गया था . बलशाली शेर को जाल से मुक्त करने का काम  चूहे ने किया था , शेर के पास बल था किन्तु तर्क चूहे के पास था और बल को मुक्ति तर्क ने दी . जरूरत है कि आज के बाजार रूपी शेर से तर्क के सहारे मुक्ति पाने की .न कि आँखें बंद कर अपनी  गरदन  बाजार रूपी शेर के सामने कर देनी की . प्रार्थना के जो उपाय पुरखों ने दिए उन पर चिंतन करने के वजाय लोग आँखें बंद किये हुए हैं इसका लाभ बाजार को मिल रहा है  भगवान् गणेश का जन्म  दिन के मध्य भाग में माना गया है . राम भी दिन के बारह  बजे ही प्रकट हुए थे और भगवान् क्रष्ण रात बारह बजे . भगवान् ईसा मशीह का जन्म भी रात बारह बजे माना जाता है .इनके अलावा और भी अनेक शक्तियाँ हैं जो बारह बजे अवतरित  हैं .यह अलग से एक  चिंतन का विषय है लिकिन हमारे पुरखों भगवान गणेश के वारे में जो कुछ कहा है उस दर्शन की व्याख्या की जानी चाहए न कि आँखें मूँद कर काम करते रहें . भगवान गणेश को  मोदक बहुत प्रिय हैं .इसका एक मतलब यह भी निकलता है कि जिस पिता का पुत्र हमेशा मोदक ही खाता रहे वह पिता, गणेश भगवान् के पिता शंकर की तरह लंगोटी ही लगाए गा .  इसलिए जो स्थूल दिख रहा उससे अधिक उसके पीछे  छिपा हुआ अर्थ  है जरूरत उसे पकड़ने की है . भगवान गणेश हमें ऐसा ज्ञान दें जो आज के बाजार रूपी दैत्य से लड़ सके . आज के दिन  हम यही प्रार्थना करते हैं .

3 comments:

जवाहर चौधरी said...

वाह राकेश भाई ,
नए विचार है .
कम्पुटर और माउस , मोदक
प्रेम और पिता की लंगोट !!
रोचक सामग्री के लिए
साधुवाद .

शोभा said...

विचार प्रधान लेख लिखा है। विचार करने के लिए प्रेरित करता है। बहुत अच्छा।

प्रदीप कांत said...

बाज़ार है भाई, बुद्धि तो बिकती है - तभी तो लाखों के पेकेज लोगों को मिलते हैं।