Thursday, May 13, 2010

बाल कविताओं का ऐतिहासिक संग्रह

आज हिन्दी में लगभग सभी बड़े कवी बाल कवितायेँ नहीं लिख रहे हैं । असल में बाल कविता लिखना सरल काम नहीं है । जब तक मन बच्चों की तरह पवित्र न होगा तब तक बाल कविता नहीं लिखी जा सकती है । एक समय था जब हिन्दी के सभी बड़े कवि बच्चों के लए कविता लिखते थे । आज के एस कठिन समय में सबसे अधिक नुक्सान बच्चों का ही हो रहा है । उनसे बचपन के कोमल स्पंदन छीन लिए गए हैं और उन्हें बलात युवक होने के लिए मजबूर किया जा रहा है । कारण अनेक हैं उन पर चर्चा बाद में होगी । इस वक्त तो कवि श्री ''कृष्ण शलभ '' दुआरा संपादित पुस्तक '' बचपन एक समंदर '' की बात हो रही है । इस संग्रह में हिन्दी के 666kaviyon की कवियों को रखा गया है । हिन्दी में बाल कविताओं का उद्भव कब हुआ इस पर एक टिप्पड़ी देखिये --''कौन है हिन्दी बाल कविता का प्रथम स्रष्टा , यह विचार , चिंतन निरंतर होता रहा है । इसके सहारे कुछ जगनिक [११००---१२००]के आल्ह खंड से , कुछ अमीर खुसरो [१२८३--१३२८] और कुछ महाकवि सूरदास [१४७८--१५८३] के क्रष्ण लीला पदों व तुलसीदास कृत काव्य [१५३२--१६२३]से भी इसके प्रादुर्भाव के सूत्र जोड़ते हैं '' । बहरहाल पुस्तक को देखकर आश्चर्य होता है की कैसे एक मुस्किल काम को पूरा किया गया । पुराने से लेकर नये सभी कवि अपनी बाल कवितों के साथ यहाँ उपस्थित हैं । हिन्दी में यह पहला बाल संग्रह है जो हमारे सामने पूरी तस्वीर उपस्थित करता है । इतना ही नहीं सभी कवियों के आवासीय पते भी उपलब्ध कराये गए हैं । ७३० प्रष्टों के इस संग्रह के कवर पर पर श्री प्रकाश मनु की टिप्पड़ी देखें ''ये ऐसी बाल कविताएँ हैं , जिन्हें विश्व की किसी भी अच्छी से अच्छी बाल कविता के सामने रखा जा सकता है । '' यह पुस्तक हिन्दी साहित्य की बहुमूल्य धरोहर है । पुस्तक '' बचपन एक समंदर '' सम्पादक '' श्री क्रष्ण शलभ '', मूल्य रु ७५० , प्रकाशक --''नीरजा स्मरति बाल साहित्य न्यास , २४५ , नया आवास विकास , सहारनपुर ,[उ प ]-२४७००१ -- प्रस्तुती राकेश शर्मा ।

4 comments:

माधव said...

nice, i will read it as and when i will able to read

http://madhavrai.blogspot.com/
http://qsba.blogspot.com/

माधव said...

good
http://madhavrai.blogspot.com/

nilesh mathur said...

jankari dene ke liye dhanyawaad!

प्रदीप कांत said...

BADHIYA JANKAREE